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Breast Milk Jaundice : कà¥à¤¯à¤¾ आप जानती हैं नवजात शिशà¥à¤“ं में होने वाली इस बीमारी के बारे में?
शिशà¥à¤“ं में पैदा होते ही पीलिया होना काफी सामानà¥à¤¯ है, लेकिन यह महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है कि आप इसके कारण, पà¥à¤°à¤•ार और उपचार के बारे में जानें।
नवजात शिशॠपीलिया से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हो सकते हैं। पीलिया, हाई बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ के सà¥à¤¤à¤° का संकेत है। यह जीवन के पहले हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के दौरान आम है, खासकर समय से पहले या देर से आने वाले नवजात शिशà¥à¤“ं में। लाल रकà¥à¤¤ कोशिकाओं के सामानà¥à¤¯ बà¥à¤°à¥‡à¤•आउट से à¤à¤• उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨, कई कारणों से नवजात शिशà¥à¤“ं में हाई हो जाता है:
उचà¥à¤š लाल रकà¥à¤¤ कोशिका à¤à¤•ागà¥à¤°à¤¤à¤¾ के कारण नवजात शिशà¥à¤“ं में बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ की दर अधिक होती है। और नवजात शिशà¥à¤“ं का लिवर ठीक से काम नहीं करता है, जिससे बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ का मेटाबॉलिजà¥à¤® धीमा हो जाता है।
नवजात शिशà¥à¤“ं में मेकोनियम के पारित होने में देरी हो सकती है, जिससे आंतों में बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ का अवशोषण बढ़ जाता है।
अधिकांश नवजात शिशà¥à¤“ं में, पीलिया को हानिरहित माना जाता है।
बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤«à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग जॉनà¥à¤¡à¤¿à¤¸ और बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ मिलà¥à¤• जॉनà¥à¤¡à¤¿à¤¸ में कà¥à¤¯à¤¾ अंतर है
पहले जानिठबà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤«à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग जॉनà¥à¤¡à¤¿à¤¸ के बारे में
इस तरह का पीलिया, अकà¥à¤¸à¤° जीवन के पहले सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में होता है जब सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किया जा रहा होता है। नवजात शिशà¥à¤“ं को इषà¥à¤Ÿà¤¤à¤® दूध का सेवन नहीं मिल सकता है, जिससे आंतों में बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ के पà¥à¤¨: अवशोषण में वृदà¥à¤§à¤¿ के कारण बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ का सà¥à¤¤à¤° बढ़ जाता है। अपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ दूध का सेवन मेकोनियम के पारित होने में à¤à¥€ देरी करता है, जिसमें बड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ होता है जिसे बाद में शिशॠके परिसंचरण में सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¾à¤‚तरित कर दिया जाता है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° मामलों में, सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ जारी रह सकता है और करना à¤à¥€ चाहिà¤à¥¤ अधिक फ़ीड पीलिया के जोखिम को कम कर सकते हैं।
सà¥à¤¤à¤¨ के दूध का पीलिया अकà¥à¤¸à¤° जीवन के दूसरे या बाद के हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ में होता है और कई हफà¥à¤¤à¥‹à¤‚ तक जारी रह सकता है। जबकि सà¥à¤¤à¤¨ के दूध में पीलिया होने का सटीक तंतà¥à¤° अजà¥à¤žà¤¾à¤¤ है, यह माना जाता है कि मां के दूध में पदारà¥à¤¥ बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ को पà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥‡à¤¸ करने के लिठशिशॠके लिवर की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को रोकते हैं।
दो साल तक सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने वाली महिलाओं को इसका जोखिम कम होता है। चितà¥à¤°: शटरसà¥â€à¤Ÿà¥‰à¤•
इलाज:
आपको यह सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करना चाहिठकि आपके बचà¥à¤šà¥‡ को परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ दूध मिल रहा है।
पहले दिन से शà¥à¤°à¥‚ करके हर दिन लगà¤à¤— 10 से 12 बार à¤à¥‹à¤œà¤¨ करें। जब à¤à¥€ बचà¥à¤šà¤¾ सतरà¥à¤• हो, हाथों को चूसे और होठों को सूंघे, तो उसे दूध पिलाà¤à¤‚। इस तरह बचà¥à¤šà¥‡ आपको बताते हैं कि वे à¤à¥‚खे हैं। à¤à¥‚ख के संकेतों को पहचानें।
सही लैच की जांच करने और दूध के पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ का आकलन करने के लिठसà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ सलाहकार की मदद लें
पीलिया के लिठफोटोथेरेपी à¤à¤• सामानà¥à¤¯ उपचार है।
अगर बचà¥à¤šà¥‡ को पीलिया है तो कà¥à¤¯à¤¾ मां को सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ जारी रखना चाहिà¤?
आमतौर पर, पीलिया से पीड़ित अधिकांश नवजात शिशॠसà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ जारी रख सकते हैं। अधिक बार सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने से मां के दूध की आपूरà¥à¤¤à¤¿ में सà¥à¤§à¤¾à¤° हो सकता है और बदले में, शिशॠके कैलोरी सेवन और हाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ में सà¥à¤§à¤¾à¤° हो सकता है। इस पà¥à¤°à¤•ार हाई बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ को कम किया जा सकता है।
असà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ रूप से सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ में रà¥à¤•ावट की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है, इस दौरान माताओं को अपना दूध उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ बनाठरखने में मदद करना महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है।
कà¥à¤¯à¤¾ पीलिया से पीड़ित शिशॠको पूरक आहार देना चाहिà¤?
कà¤à¥€-कà¤à¥€à¥¤ पीलिया से पीड़ित नवजात शिशॠके सपलीमेंट के बारे में कोई à¤à¥€ निरà¥à¤£à¤¯ डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पूछ कर किया जाना चाहिà¤à¥¤
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